اَللّهُمَّ قَوِّنِی فِیهِ عَلَی إِقَامَةِ أَمْرِک وَ أَذِقْنِی فِیهِ حَلاوَةَ ذِکرِک وَ أَوْزِعْنِی فِیهِ لِأَدَاءِ شُکرِک بِکرَمِک وَ احْفَظْنِی فِیهِ بِحِفْظِک وَ سِتْرِک یا أَبْصَرَ النَّاظِرِینَ
ख़ुदाया इस महीने अपने अहकाम की पैरवी करने की ताक़त अता फ़रमा, मुझे अपने ज़िक्र की मिठास चखा दे, अपना शुक्र अदा करने की तौफ़ीक़ दे और मुझे अपनी पनाह में महफ़ूज़ फ़रमा, ऐ देखने वालों में सबसे ज़्यादा बीनाई रखने वाले।